हमसे तेरा रिश्ता क्या है?
शायद कोई समझेगा ना
दिल से धड़कन, रूह से जीवन
सदियों का मौसम से जैसा
इस बंधन को खोने ना दूँ
सौ जन्मों तक इसमें जी लूँ
तेरी ख़ातिर जन्नत को भी
हँसते-हँसते रुख़सत कर दूँ
आसमाँ भी कम लगे मुझको
इतनी उल्फ़त जो तुमसे है मुझको
जो ख़ुदा भी माँग ले तुमको
चाहें कुछ भी हो, ना मैं दूँ तुमको
मर भी जाऊँगा, तो लौट आऊँगा
बस तेरे संग जीने को
कैसे मोहब्बत करूँ?, दो दिन की ज़िंदगी में
कैसे समंदर भरूँ?, अपनी हथेलियों में
अब तो ख़ुदा से कहूँ, "मुझको कहीं ज़िंदगी दे"
जी भर के जी लूँ, मैं प्यार कर लूँ
मुझे ये खुशकिस्मती दे
आसमाँ भी कम लगे मुझको
इतनी उल्फ़त जो तुमसे है मुझको
जो ख़ुदा भी माँग ले तुमको
चाहें कुछ भी हो, ना मैं दूँ तुमको
मर भी जाऊँगा, तो लौट आऊँगा
बस तेरे संग जीने को
तेरे ही संग है मेरा सफ़र
तेरे हुई मैं हमसफ़र
तेरे सिवा ना कोई है मेरा
तू सौ जन्म की बात ना कर
मुझे तू इतना तू बोल पर
के उमर भर तू देगा साथ मेरा
मर भी जाऊँगा, तो लौट आऊँगा
बस तेरे संग जीने को
संग जीने को
संग जीने को
संग जीने को